नाभि खिसकने की शिकायत बार-बार लौटने की सबसे आम वजह यह है कि हर बार सिर्फ़ तनाव हटाया जाता है, उसकी वजह नहीं।
एक बार आराम मिल जाता है, कुछ हफ़्ते सब ठीक चलता है, और फिर वही पेट का भारीपन और वही पाचन की गड़बड़ी लौट आती है। ज़्यादातर लोग तब वही पुराना नुस्खा दोहरा देते हैं, और चक्र वहीं का वहीं रह जाता है।
आगे हम देखेंगे कि यह चक्र बनता कैसे है, किन लोगों में यह सबसे ज़्यादा चलता है, लंबे समय तक इसे नज़रअंदाज़ करने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है, और इसे तोड़ने के तरीके क्या हैं।
नाभि बार-बार क्यों खिसकती है?
नाभि बार-बार नहीं खिसकती, बल्कि जिस कमज़ोरी से तकलीफ़ पैदा होती है वह ठीक नहीं होती और इसीलिए शिकायत लौट आती है। नाभि पेट की दीवार से जुड़ी होती है और अपनी जगह से हिलती नहीं। जिसे लोग नाभि खिसकना कहते हैं, उसमें पेट की मांसपेशियाँ तन जाती हैं, कोर मसल्स कमज़ोर पड़ जाते हैं और पोस्चर बिगड़ जाता है।
मालिश या आराम से तनाव कुछ दिनों के लिए घट जाता है, पर कमज़ोरी वहीं की वहीं रहती है। जैसे ही दोबारा भारी काम पड़ता है, वही तकलीफ़ लौट आती है। यही वजह है कि इलाज के बाद भी शिकायत बार-बार होती है।
नाभि खिसकने की तकलीफ़ बार-बार लौटने के कारण क्या हैं?
नाभि खिसकने की तकलीफ़ इसलिए लौटती है क्योंकि पेट के अंदर दबाव बढ़ाने वाली रोज़ की आदतें बदली नहीं जातीं, जैसे कि:
गलत तरीके से वज़न उठाना: कमर से झुककर सामान उठाने पर पूरा दबाव एक ही जगह पड़ता है। जिनका काम ही यही है, उनके लिए यह रोज़ का सिलसिला बन जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कैरोलाइना, चैपल हिल की एनवायरनमेंट, हेल्थ एंड सेफ़्टी गाइड के अनुसार गलत तरीके से या बहुत भारी सामान उठाने से होने वाले स्ट्रेन और स्प्रेन सबसे आम चोटों में हैं, और झुकने के बाद मुड़ना व घुमाना वे हरकतें हैं जो सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाती हैं।
अचानक झटके वाली हरकत: तेज़ी से मुड़ना या एकदम से सीधे होना पहले से खिंची मांसपेशियों पर दोबारा ज़ोर डालता है।
कब्ज़ और पुरानी खाँसी: मल त्याग के समय ज़ोर लगाना और लगातार खाँसना, दोनों पेट के अंदर का दबाव बार-बार बढ़ाते हैं। जब तक ये चलते रहेंगे, कोर मज़बूत करने का असर टिकेगा नहीं।
लंबे समय तक बैठे रहना: दिनभर कुर्सी पर झुककर बैठने से कोर मसल्स धीरे-धीरे सुस्त पड़ जाते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार लगातार बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि की कमी का सीधा असर कोर मांसपेशियों की ताक़त पर पड़ता है। यही मांसपेशियाँ पोस्चर, संतुलन और रोज़मर्रा के कामों को संभालती हैं, इसलिए इनके कमज़ोर होते ही पेट पर पड़ने वाला भार बढ़ जाता है।
इलाज बीच में छोड़ देना: दर्द जाते ही ज़्यादातर लोग एक्सरसाइज़ बंद कर देते हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि नाभि खिसकने की तकलीफ़ कुछ महीनों बाद वापस आ जाती है।
नाभि खिसकने का जोखिम किन लोगों में सबसे ज़्यादा होता है?
जिनका पेट रोज़ किसी न किसी तरह के दबाव में रहता है, उनमें नाभि खिसकने की शिकायत सबसे ज़्यादा लौटती है।
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पेट की ये मांसपेशियाँ एक कुदरती सपोर्ट बेल्ट की तरह काम करती हैं, जो अंगों को उनकी जगह पर रखती हैं और चलने, वज़न उठाने या खाँसने जैसी रोज़मर्रा की हरकतों के दौरान रीढ़ की रक्षा करती हैं। इसी रिपोर्ट में बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. मृगांक एस शर्मा और डॉ. अमित डी गोस्वामी के हवाले से बताया गया है कि पेट में लंबे समय तक जमी चर्बी इस दीवार को धीरे-धीरे कमज़ोर कर सकती है, और यह अक्सर शुरुआत में बिना किसी साफ़ लक्षण के होता है।
- रोज़ भारी सामान उठाने वाले, जैसे मज़दूरी, डिलीवरी या गोदाम का काम करने वाले
- घंटों एक ही पोज़ीशन में बैठकर काम करने वाले
- डिलीवरी के बाद की महिलाएँ, जिनकी पेट की मांसपेशियाँ महीनों तक खिंची रही हों
- ज़्यादा वज़न वाले लोग, क्योंकि पेट की दीवार पर लगातार अतिरिक्त भार रहता है
- पुरानी कब्ज़ या लंबी खाँसी वाले लोग
- हाल ही में पेट की सर्जरी करा चुके लोग
नाभि खिसकने से बचाव के तरीके क्या हैं?
नाभि खिसकने से बचने के लिए रोज़मर्रा की ऐसी आदतों पर ध्यान देना ज़रूरी है जो पेट की मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव या खिंचाव डाल सकती हैं।
- सही तरीके से वज़न उठाएं: कमर से सीधे झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर नीचे जाएं और वज़न को शरीर के करीब रखते हुए उठाएं।
- कोर एक्सरसाइज़ करें: पेट और कोर की मांसपेशियों को मजबूत रखने से शरीर को बेहतर सपोर्ट मिलता है और मांसपेशियों का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
- कब्ज़ से बचें: पर्याप्त पानी और फाइबर लें, ताकि मल त्याग के दौरान ज़्यादा ज़ोर लगाने की जरूरत न पड़े।
- वज़न संतुलित रखें: अतिरिक्त वजन पेट की मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों पर दबाव बढ़ा सकता है।
- अचानक होने वाली हरकतों से बचें: तेज़ी से झुकने, मुड़ने या अचानक सीधा होने जैसी गतिविधियों में सावधानी रखें, खासकर यदि पहले से पेट या कमर में परेशानी हो।
- पोस्चर सही रखें: लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने या खड़े रहने से बचें और रोज़मर्रा की गतिविधियों के दौरान शरीर की सही एलाइनमेंट बनाए रखें।
- गर्भावस्था में विशेषज्ञ की सलाह लें: गर्भावस्था के दौरान कोई भी कोर एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधि शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से उचित सलाह लें।
निष्कर्ष
नाभि बार-बार खिसकने की शिकायत असल में एक अधूरे इलाज की कहानी है। तनाव हटाना आसान है और जल्दी हो जाता है, पर जब तक कोर मज़बूत नहीं होता और रोज़ की आदतें नहीं बदलतीं, तकलीफ़ लौटती रहती है।
Painflame में इसी दोहराव को तोड़ने पर काम होता है। जाँच में यह देखा जाता है कि दबाव बार-बार कहाँ से आ रहा है, फिर मैनुअल थेरेपी से आराम देने के बाद कोर स्ट्रेंथनिंग और पोस्चर का प्लान दिया जाता है, और फ़ॉलो-अप में यह जाँचा जाता है कि सुधार टिक रहा है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारी सामान उठाना काम का हिस्सा हो तो नाभि खिसकने से कैसे बचें?
भारी सामान उठाना काम का हिस्सा हो तो नाभि खिसकने से बचने का सबसे व्यावहारिक तरीका उठाने की तकनीक बदलना है। कमर से झुकने के बजाय घुटने मोड़कर बैठें, वज़न शरीर के पास रखें, और उठाते समय साँस रोकने के बजाय छोड़ें। भारी चीज़ अकेले उठाने के बजाय बाँटकर या किसी की मदद से उठाएँ।
2. क्या पेट पर बेल्ट या बाइंडर बाँधने से नाभि दोबारा खिसकने से बचाव होता है?
बेल्ट या बाइंडर सहारा देता है, पर यहनाभि दोबारा खिसकने से बचाव का तरीका नहीं है। डिलीवरी के बाद के शुरुआती हफ़्तों में इसे पेट और कमर को सहारा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे लंबे समय तक कोर एक्सरसाइज़ के विकल्प के तौर पर पहनना ठीक नहीं, क्योंकि मज़बूती एक्सरसाइज़ से आती है, सहारे से नहीं।
3. नाभि खिसकने की तकलीफ़ ठीक होने के बाद जिम या भारी वर्कआउट कब शुरू करें?
नाभि खिसकने की तकलीफ़ ठीक होने के बाद जिम या भारी वर्कआउट दर्द पूरी तरह जाने के दो से तीन हफ़्ते बाद ही शुरू करना चाहिए। शुरुआत हल्की कोर एक्सरसाइज़ से करें और उसके बाद धीरे-धीरे वज़न बढ़ाएँ। सबसे ज़्यादा जोखिम सिट-अप्स, क्रंचेज़ और सिर के ऊपर वज़न उठाने वाली एक्सरसाइज़ में रहता है, क्योंकि इनमें पेट के अंदर का दबाव सबसे तेज़ी से बढ़ता है। इन्हें सबसे आख़िर में जोड़ें।
4. डिलीवरी के बाद नाभि खिसकने की शिकायत ज़्यादा क्यों होती है?
डिलीवरी के बाद नाभि खिसकने की शिकायत इसलिए ज़्यादा होती है क्योंकि पेट की मांसपेशियाँ महीनों तक खिंची रहने के बाद कमज़ोर पड़ जाती हैं और उन्हें पहले जैसी ताक़त लौटने में समय लगता है। ठीक इसी दौर में बच्चे को दिनभर उठाना पड़ता है, जिससे पहले से कमज़ोर पेट पर लगातार भार बना रहता है। इसीलिए इस दौरान एक्सरसाइज़ किसी जानकार की निगरानी में ही शुरू करनी चाहिए।
5. क्या पुरानी खाँसी या कब्ज़ का इलाज कराने से नाभि खिसकने की शिकायत कम होती है?
पुरानी खाँसी या कब्ज़ का इलाज कराने से नाभि खिसकने की शिकायत कम होती है, क्योंकि दोनों ही पेट के अंदर का दबाव बार-बार बढ़ाते हैं। लगातार खाँसना और मल त्याग के समय ज़ोर लगाना, दोनों उसी पेट की दीवार पर दबाव डालते हैं जिसे मज़बूत करने की कोशिश हो रही होती है। जब तक ये चलते रहेंगे, कोर एक्सरसाइज़ का असर टिकेगा नहीं, इसलिए इनका इलाज बचाव का हिस्सा है, अलग समस्या नहीं।
Sources:
https://www.batigoz.com/en/health-guide/belly-sagging-and-umbilical-hernia